पुरातन विश्व का एक नूतन जोड़
कथित जीवनी छोड़
धरा के अंतर को बींध कर
रही हृदय की गतिसीमा तोड़
और कितने संशिप्त में
रखे स्वांस की चाह
भावना कलंकित कर
निर्झारा सी विलुप्ति
नयनो के कुटीर को
मानो हो रही बना
मुठिबंद संपत्ति
और व्यथा की
मृदुल छवि में जैसे
वीरांगना जन्नति
कोलाहल की संतती
-- -- केया
कथित जीवनी छोड़
धरा के अंतर को बींध कर
रही हृदय की गतिसीमा तोड़
और कितने संशिप्त में
रखे स्वांस की चाह
भावना कलंकित कर
निर्झारा सी विलुप्ति
नयनो के कुटीर को
मानो हो रही बना
मुठिबंद संपत्ति
और व्यथा की
मृदुल छवि में जैसे
वीरांगना जन्नति
कोलाहल की संतती
-- -- केया
