Friday, July 18, 2008

मेरे प्यारे पिता

खुरदुरे हाथ का कोमल स्पर्श
और नही दे सकता कोई
जो सुबह मुझे उठाने
और रात को मुझे सुलाने
मेरे सिरहाने आकर
प्यारे पिता, तुम दे जाते हो
और कभी जब नींद न आए तो
प्यार से, सर पर,
हाथ फेर कर, मुझे
देर रात तक सहलाते हो .
स्वप्नों के आँचल में लिपटी
आँखे, सुबह जब, उठने से
जी चुराती है,
गर्म चाय की प्याली लाकर
सुबह प्यार से उठाते हो।
जीवन की हर परीक्षा में,
चाहे जीत हो ,
या हो हार,
तुम सदा मेरी पीठ थपथपाते हो
मेरा हर, दुःख - दर्द बाटते
और मेरे हर,
अटपटे चुटकुले पर हसतें ,
लेकिन अपना हर दर्द छिपाते हो.........

4 comments:

डाॅ रामजी गिरि said...

"और कभी जब नींद न आए तो
प्यार से, सर पर,
हाथ फेर कर, मुझे
देर रात तक सहलाते हो .
स्वप्नों के आँचल में लिपटी
आँखे, सुबह जब, उठने से
जी चुराती है,
गर्म चाय की प्याली लाकर
सुबह प्यार से उठाते हो।"

U r too lucky to have such a caring n lovig Father,Devarshi...
N u have sketched ue emotional landscape in very beautiful words..

MOHIT Rajpoot said...

MERA NO. KAB AYEGA .ITS YRY VRY BUTIFUL.BCZ UR TOPIC PITA EK AKALPINY TOPIC H.N.UR IMAGINATION SHOW UR OWN.

Unknown said...

very nice and buetiful emosational poim Devashri

raj said...

वाह जी वाह ...इक गल पुछां "तुसी ऐना स्वीट किदा लिखदे हो ..
पढ़कर इसको आँखों में एक अजीब सी नमी आ गयी...
गलतियों को ढकने के लिए मेरी ...लोगों के सामने मारते थे ऐसे कि लगे भी ना और रो भी दूँ मैं .....याद आ गए wo पिता