हे मीरा के श्याम
क्यूँ हो तुम खड़े
कर-कमलों में बांसुरी धरे ?
क्यूँ नही करते शंखनाद
जो किया था, तुमने
महाभारत में?
हे अर्जुन के सारथी
क्यूँ नही रचते,
एक और महाभारत?
देखो पतन की ओर चला
आज फिर से संपूर्ण भारत ।
रहोगे तुम कब तक सुप्त
उठो! देखो! हे श्याम जग को
क्या होने दोगे मानवता लुप्त ?
जीवित रहे मीरा, विष पिए ,
क्या तुम्हारी, वह शक्ति हुई लुप्त ?
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3 comments:
"विजयी होगा अभिमन्यु"
गत वर्ष हिंदी अंतर्जाल की एक पत्रिका में मैंने यह कविता लिखी थी .. आज आपकी इस सुन्दर रचना से रू-बरू होने पर इन पंक्तियों की फिर याद आयी .....
हर मोड़ पर
उलझा
अभिमन्यु मरता है
रोज़.
उम्र के साथ
बुज़ुर्ग हो गये हैं भीष्म,
बातें आदर्श की
निष्ठा की,
पर साथ
दुर्योधन का
शकुनी का,
जिनकी गिरफ़्त में है
सारा धर्म, ये समाज।
गद्दी पर आसीन
जरासंध
धृतराष्ट्र,
मत करो अब
कृष्ण का इन्तजार।
अभिमन्यु ही तोड़ सकता है,
ये चक्रव्यहू,
धर्म के ठेकेदारों का
इन्द्रजाल
धर्म के महाभारत का।
मुट्ठी भर पांडव
बिखरे बन्द महलों में,
करते कॄष्ण का इन्तज़ार.
द्रौपदी की लाज़
सुदामा की इज़्जत
सरे आम लगती बोली
रोज चौराहों पर
कृष्ण नहीं हैं कहीं।
कॄष्ण ने तब भी नहीं दिया था
साथ
अभिमन्यु का
मत करो
उसका इन्तजार।
चाहिए अब
एक नहीं
सात-सात अभिमन्यु.
एक साथ एकजुट
टूटेगा चक्रव्यहू,
चाहिए
समग्र चेतना
नव नेतृत्व ,
अपने सामर्थ्य पर
विजयी होगा अभिमन्यु
अब इस बार।
i have no wrds.bcz meri english weak h .aj mujhse jyada khush koi bhi nhi h.bcz apko maine poem likhna start karte dekha the.main to apke samne kuch bhi nhe.god apko bhut age le jayge .bcz ache logi k sath acha hi hota h
its a very very very good poim word slection and their meaning teach to hart
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